G-B7QRPMNW6J अप्रैल का महीना काफी अहम रहने वाला है इस महीने में बृहस्पति व शनि व राहु-केतु का राशि परिवर्तन


 

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अप्रैल का महीना काफी अहम रहने वाला है इस महीने में बृहस्पति व शनि व राहु-केतु का राशि परिवर्तन

अप्रैल का महीना काफी अहम रहने वाला है इस महीने में बृहस्पति व शनि व राहु-केतु का राशि परिवर्तन

ग्रहों के राशि परिवर्तन के लिहाज से अप्रैल का महीना काफी अहम रहने वाला है। इस महीने में सभी ग्रहों में सबसे मंद गति से चलने वाले ग्रह शनि का राशि परिवर्तन तो होगा ही साथ में सबसे बड़े ग्रह देव गुरु बृहस्पति और छाया ग्रह राहु-केतु भी अपनी राशि बदलने वाले हैं। शनि के बाद राहु ही ऐसे ग्रह हैं जो 18 महीनों के बाद राशि परिवर्तन करते हैं। आज हम आपको राहु के राशि परिवर्तन के बारे में बताएंगे। राहु वृषभ राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करेंगे वहीं केतु वृश्चिक राशि से निकलकर तुला राशि में प्रवेश करेंगे।

राहु ग्रह मेष राशि का शत्रु है और तुला और केतु के बीच कोई शत्रुता नहीं है। दरअसल मेष राशि का स्वामी ग्रह मंगल है और मंगल-राहु में शत्रुता बताई गई है वहीं तुला राशि का स्वामी ग्रह शुक्र है और शुक्र- केतु में मित्रता नहीं है तो शत्रुता भी नहीं है। एक तरह से देखा जाए तो शुक्र ग्रह के देवता शुक्राचार्य राक्षसों के आराध्य हैं, राहु-केतु में राक्षसों की श्रेणी में आते हैं, तो इस तरह से केतु और शुक्र कभी शत्रु हो ही नहीं सकते हैं।'

वैदिक ज्योतिष में राहु का गोचर


वैदिक ज्योतिष शास्त्र में राहु ग्रह को सभी नौ ग्रहों में खास माना गया है। ज्योतिष में राहु को भ्रम में डालने वाला ग्रह माना गया है। राहु के प्रभाव से जातकों के मन मस्ष्तिक में काफी उथल-पुथल रहती है। ऐसे जातक खोए-खोए हुए होते हैं। राहु के प्रभाव से व्यक्ति को बुरी आदतें लगने की संभावना होती जैसे जातक जुआ, नशा, बुरी लत और गैर कानूनी कामों में लगे हुए होते हैं। हालांकि यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि राहु जातक की कुंडली में किस भाव में स्थित है। अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में राहु शुभ भाव में स्थित है तो सकारात्मक फल देता है और अशुभ भाव में स्थित है तो नकारात्मक फल प्रदान करता है।

खगोलीय रूप से, राहु और केतु आकाशीय गोले पर चलते हुए सूर्य और चंद्रमा के पथों के प्रतिच्छेदन बिंदुओं को दर्शाते हैं। इसलिए राहु और केतु को क्रमशः चन्द्रमा की उत्तरी नोड और चन्द्रमा की दक्षिणी नोड कहा जाता है। यही वजह है कि यह दोनों ही ग्रह हमेशा एक दूसरे से 180 डिग्री अलग होते हैं और एक ही समय और एक ही दिन में अलग-अलग राशियों में अपनी गति बदलते हैं।

राहु और केतु को संयुक्त रूप से एक सांप के रूप का प्रतीक माना गया है। जहाँ राहु उस सांप का मस्तक होता है वहीं सांप की शेष शरीर केतु मानी जाती है। यह दोनों ही ग्रह पापी स्वभाव के होते हैं और वक्री गति में चलते हैं। ऐसे में 12 अप्रैल, 2022 को सुबह 11 बजकर 18 मिनट पर राहु मेष राशि में गोचर करेगा और केतु तुला राशि में गोचर करेगा।

राहु और केतु के मेष और तुला राशि में गोचर का अर्थ


कहा जाता है जब राहु मेष राशि में गोचर करता है तो यह मेष राशि के गुणों की मिसाल पेश करता है। यह राशि चक्र की पहली राशि होती है जो स्वयं का प्रतिनिधित्व करती है इसलिए उम्मीद की जा सकती है कि मेष राशि में राहु का यह गोचर लोगों को थोड़ा स्वार्थी बना सकता है। मुमकिन है कि इस गोचर के प्रभाव स्वरूप आप आत्ममुग्ध (आत्म केंद्रित) महसूस कर सकते हैं। अर्थात आप इस दौरान केवल अपने बारे में सोचने में ज्यादा ध्यान केंद्रित करेंगे कि, आपको क्या चाहिए? आप कैसे दिख रहे हैं? इत्यादि।

वहीं दूसरी तरफ केतु का तुला राशि में गोचर होगा। तुला साझेदारी की राशि मानी जाती है। ऐसे में तुला राशि में केतु गोचर के प्रभाव स्वरूप लोग अपनी प्रतिबद्धताओं से कुछ को अलग महसूस कर सकते हैं। फिर चाहे बात करें व्यवसायिक साझेदारी की या फिर व्यक्तिगत संबंधों की दोनों पर ही केतु के इस गोचर का प्रभाव देखने को मिलेगा।

राहु और केतु के मेष और तुला राशि में गोचर का भारत और विश्व पर प्रभाव


दुनिया भर में छवि की बेहतरी के लिए कई देश अपनी ताकत बढ़ाने के लिए पैसे खर्च करते नज़र आयेंगे।
कई राजनीतिक गठबंधन या साझेदारी खत्म हो सकती है।
लोग धर्म और पौराणिक कथाओं में रुचि खो सकते हैं और भौतिकवादी दुनिया की ओर अधिक झुकाव रखते नज़र आ सकते हैं।
राहु और केतु के गोचर का मेष राशि और तुला राशि के जातकों पर प्रभाव
लोग आत्मकेन्द्रित हो जाएंगे और अपने बारे में ज्यादा सोचेंगे।
लोगों में दिखावे की आदत बढ़ सकती है।
गैर वफादार साझेदारी चाहे वह व्यवसाय हो या व्यक्तिगत समाप्त हो जाएगी।
इसके अलावा वफादार साझेदारी के लिए यह परीक्षा का समय रहेगा, इस दौरान लोगों को कठिन समय का सामना करना पड़ सकता है लेकिन यहाँ अच्छी बात यह है कि लोग अपने रिश्ते/साझेदारी को अंत नहीं करेंगे।


राहु और केतु का मेष और तुला राशि में गोचर और इसका राशिफल प्रभाव


मेष राशि: मेष राशि के जातकों के लिए यह एक ऐसा समय साबित होगा जब आप खुद पर ज्यादा काम करते नजर आ सकते हैं। आप अपने जीवन में अचानक ऊर्जा और आत्मविश्वास बढ़ता देखेंगे लेकिन आपको यहां सतर्क रहने की जरूरत है। क्योंकि खुद पर इतना ध्यान केंद्रित करने से आप मतलबी और स्वार्थी ना बन जाए इस बात का भी ध्यान रखें। दूसरों को नज़रअंदाज़ ना करें और अपने जीवन साथी के साथ वाद-विवाद या लड़ाई करने से बचें। इसके अलावा अपने व्यापारिक साझेदार को धोखा भी ना देने की सलाह दी जाती है।

आपके लिए राहु का राशि परिवर्तन लग्न राशि के दूसरे भाव में गोचर करने वाले हैं। इस कारण से मेष राशि के जातकों के पेशेवर और पारिवारिक जीवन में काफी बदलाव देखने को मिलेगा। नौकरी करने वाले जातकों के जीवन में काफी उथल-पुथल रहने वाला होगा। इस दौरान किसी भी प्रकार का धन निवेश करने से बचें। नौकरी करते समय संयम और अपनी वाणी को ज्यादा कठोर और कटु न करें। राहु का यह गोचर आपके आर्थिक स्थितियों में बदलाव देखने को मिलेगा।
राहु का गोचर आपको थोड़ा भ्रमित और विचलित कर सकता है, जिसके कारण आपको कोई भी निर्णय लेने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। राहु के गोचर करने से आपका झुकाव कुछ नया शुरू करने या अनोखा करने की ओर रह सकता है। इस दौरान आपके स्वास्थ्य में भी गिरावट देखने को मिलेगा।

वृषभ राशि: वृषभ राशि के जातक इस दौरान अपने घर या मातृभूमि से दूर जा सकते हैं। यदि आप अपने काम के लिए विदेश जाना चाहते हैं यह उसकी योजना बना रहे हैं या फिर कार्यस्थल में बदलाव करना चाहते हैं तो इसके लिए यह समय अनुकूल रहने वाला है। हालांकि सेहत के संदर्भ में आपको सतर्क रहने की सलाह दी जाती है। लापरवाही के चलते आपको अपने स्वास्थ्य पर ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है। एक स्वस्थ जीवन शैली बनाए रखने के लिए आपको सही ढंग से भोजन करने और अच्छी नींद लेने की सलाह दी जाती है।

मिथुन राशि: मिथुन राशि के जातक इस समय के दौरान की मनोकामना पूर्ति और अधिक धन कमाने, अपने सामाजिक दायरे का विस्तार करने और अपने जीवन के लिए नेटवर्क बनाने के लिए कुछ ज्यादा ही जुनूनी हो सकते हैं। लेकिन इस वजह से आप अपने प्रेम संबंधों को नजरअंदाज कर सकते हैं जिससे आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके अलावा इस समय अवधि में आपको अपने बच्चों के साथ भी कुछ परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। यदि आप विद्यार्थी हैं तो मुमकिन है कि इस दौरान आपकी पढ़ाई में भी कुछ बाधा देखने को मिले। ऐसे में सावधान रहें।

कर्क राशि: कर्क राशि के जातक इस गोचर काल के दौरान अपने पेशेवर जीवन पर जहां ज्यादा ध्यान वाले हैं वहीं आप अपने घरेलू या पारिवारिक जीवन की अनदेखी कर सकते हैं। जिससे आपका जीवन अस्त-व्यस्त हो सकता है। माता के स्वास्थ्य को लेकर आपको ज्यादा सावधान रहने की सलाह दी जाती है। भौतिकवादी स्तर पर बात करें तो यदि आप अपना घर बदलना चाहते हैं या अपनी गाड़ी बदलना चाहते हैं तो इसके लिए यह समय अनुकूल साबित हो सकता है।

सिंह राशि: सिंह राशि के जातक के समय के दौरान अन्य धर्मो या किसी अन्य देश की पौराणिक कथा में ज्यादा रुचि दिखाएंगे। इस राशि के जो जातक विदेश यात्रा करने के इच्छुक थे उन्हें इस गोचर के दौरान इस संदर्भ में शुभ अवसर प्राप्त हो सकता है। हालांकि आपको अपने पिता के स्वास्थ्य को लेकर थोड़ा सचेत रहने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा अपने भाई बहनों के साथ अपने संतुलन बनाए रखने की भी जरूरत पड़ेगी। अन्यथा आपके बीच कुछ अनबन हो सकती है।

कन्या राशि: गोचर काल की इस अवधि के दौरान कन्या राशि के जातकों को ज्यादा सावधान सतर्क रहने की जरूरत पड़ेगी क्योंकि गोचर आपके दूसरे और आठवें धुरी (एक्सिस/axis) में होने जा रहा है। इस दौरान आपकी वाणी बेहद ही कटु हो सकती है जिससे आपके जीवन में परेशानियों और अनिश्चितताओं की वृद्धि देखने को मिलेगी। इसके अलावा आपको सही खानपान की सलाह दी जाती है। अन्यथा शराब या ज्यादा तेलीय भोजन आपके जीवन में स्वास्थ्य संबंधित परेशानियां खड़ी कर सकता है और दुर्घटनाओं की संभावना भी पैदा कर सकता है।

तुला राशि: तुला राशि के जातकों के लिए यह वह समय साबित होगा जब आप दूसरों के लिए खुद की परवाह नहीं करेंगे। इस दौरान आप अपने साथी, वैवाहिक संबंध, व्यवसायिक साझेदारी, को लेकर ज्यादा जुनूनी नजर आएंगे जिसे बहुत अच्छा नहीं कहा जा सकता है। आपको सलाह दी जाती है कि आप अपने साथी को बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह और समय नहीं और खुद पर भी उचित ध्यान दें। अन्यथा आपको स्वास्थ्य समस्याओं और अपने अंदर आत्मविश्वास की कमी जैसी विकट समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

वृश्चिक राशि: वृश्चिक जातकों के लिए गोचर काल की यह अवधि अनुकूल रहेगी क्योंकि यदि आप लंबे समय से किसी विवाद या कानूनी मामलों से जूझ रहे हैं तो इस दौरान परिणाम आपके पक्ष में आने की संभावना है इसलिए सलाह दी जाती है कि इस गोचर के दौरान ही जो भी समस्या है उसे हल करने का प्रयास करें। इसके अलावा बारहवें भाव में केतु का गोचर आपको आध्यात्म और ध्यान की ओर ज्यादा प्रवृत्त करेगा।

धनु राशि: धनु राशि के जातकों के लिए राहु का गोचर पंचम भाव में होने जा रहा है जो आपको बेहद रचनात्मक बनने में मदद करेगा। ऐसे में धनु राशि के जो जातक कला के क्षेत्र से ताल्लुक रखते हैं उनके लिए यह समय अवधि बेहद ही शानदार साबित होगी। हालांकि यदि आप धनु राशि के जातक हैं और गर्भवती हैं तो इस दौरान आपको सतर्क रहने की जरूरत पड़ेगी। अन्यथा गर्भावस्था में किसी प्रकार की जटिलता का सामना आपको करना पड़ सकता है। इसके अलावा आप अपने मित्र मंडली में कुछ गलत दोस्तों को कम करने का विचार और फैसला भी कर सकते हैं।

मकर राशि: मकर राशि के जातक अपने पेशेवर जीवन और व्यक्तिगत जीवन के बीच उलझे नज़र आएंगे और आपको इन दोनों के बीच संतुलन खोजने में या बनाने में मुश्किलें उठानी पड़ सकती है। आपको सलाह दी जाती है कि अपने कार्य से अव्यवस्था को दूर करें और अपने जीवन को व्यवस्थित रखें।

कुंभ राशि: कुंभ राशि के जातक इस समय के दौरान संचार की नई कला सीखने में कामयाब रहेंगे। इसके अलावा आप अपने अंदर किसी को भी सम्मोहित करने की शक्ति महसूस करेंगे। इस दौरान आपका संचार कौशल इतना शानदार रहने वाला है कि इसके दम पर आप किसी से भी अपना काम करवा सकेंगे। इसके अलावा इस दौरान आप बेहद व्यावहारिक भी नजर आएंगे जिससे धर्म के प्रति आपकी आस्था खत्म हो सकती है। आपको अपने पिता के स्वास्थ पर ज्यादा ध्यान देने की सलाह दी जाती है।

मीन राशि: मीन राशि के जातकों के लिए यह गोचर आपके दूसरे और आठवें धुरी में होने जा रहा है जिसके कारण आप ज्यादा खानपान करने की इच्छा रखेंगे। यहां तक कि आप अपने अंदर बहुत ज्यादा पीने की आदत भी बढ़ती महसूस करेंगे जिससे आपके जीवन में स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं और दुर्घटनाएं होने की आशंका बढ़ जाती है। इसके अलावा इस दौरान आपके अंदर झूठ बोलने की आदत भी पनप सकती है जिससे आपकी छवि भी खराब हो सकती है।

इस अवधि के दौरान राहु और केतु के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के उपाय


दुर्गा चालीसा का पाठ करें या “ॐ दुर्गाय नमः” का प्रतिदिन 27 बार जाप करें।
मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा का जाप करें और हनुमान जी को बूंदी का प्रसाद चढ़ाएं।
“ॐ केतवे नमः” का जाप करें।
“ॐ रहवे नमः” का जाप करें।

आवारा कुत्तों और मछलियों को खाना खिलाएं। 

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