G-B7QRPMNW6J Ekadashi: पद्मा-परिवर्तिनी एकादशी व्रत के पुण्य के समान और कोई पुण्य नहीं है
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Ekadashi: पद्मा-परिवर्तिनी एकादशी व्रत के पुण्य के समान और कोई पुण्य नहीं है

Jyotish With AkshayG

Padma-Parivartini Ekadashi व्रत के पुण्य के समान और कोई पुण्य नहीं है

There is no virtue like the virtue of fasting Parivartini Ekadashi
There is no virtue like the virtue of fasting Parivartini Ekadashi


🌹पद्मा-परिवर्तिनी एकादशी 🌹

🔸एकादशी 25 सितम्बर सुबह 07:55 से 26 सितम्बर प्रातः 05:00 तक ।

🔸व्रत उपवास 26 सितम्बर 2023 मंगलवार को रखा जायेगा ।

⛅विशेष -  एकादशी को शिम्बी (सेम) खाने से पुत्र का नाश होता है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

🔹25 एवं 26 सितम्बर दो दिन चावल खाना और खिलाना निषेध है ।

🔸एकादशी व्रत के लाभ🔸

👉 एकादशी व्रत के पुण्य के समान और कोई पुण्य नहीं है ।

👉 जो पुण्य सूर्यग्रहण में दान से होता है, उससे कई गुना अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।

👉 जो पुण्य गौ-दान, सुवर्ण-दान, अश्वमेघ यज्ञ से होता है, उससे अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।

👉 एकादशी करनेवालों के पितर नीच योनि से मुक्त होते हैं और अपने परिवारवालों पर प्रसन्नता बरसाते हैं । इसलिए यह व्रत करने वालों के घर में सुख-शांति बनी रहती है ।

👉 धन-धान्य, पुत्रादि की वृद्धि होती है ।

👉 कीर्ति बढ़ती है, श्रद्धा-भक्ति बढ़ती है, जिससे जीवन रसमय बनता है ।

👉 परमात्मा की प्रसन्नता प्राप्त होती है । पूर्वकाल में राजा नहुष, अंबरीष, राजा गाधी आदि जिन्होंने भी एकादशी का व्रत किया, उन्हें इस पृथ्वी का समस्त ऐश्वर्य प्राप्त हुआ । भगवान शिवजी ने नारद से कहा है : एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं, इसमे कोई संदेह नहीं है । एकादशी के दिन किये हुए व्रत, गौ-दान आदि का अनंत गुना पुण्य होता है ।

🔹संध्या के समय वर्जित कार्य🔹

👉 संध्या के समय व्यवहार में चंचल नहीं होना चाहिए ।

👉 भोजन आदि खानपान नहीं करना चाहिए ।

👉 संध्या के समय बड़े निर्णय नहीं लेने चाहिए ।

👉 पठन-पाठन, शयन नहीं करना चाहिए ।

👉खराब स्थानों में घूमना नहीं चाहिए । 

👉संध्या के समय स्नान न करें ।

👉संध्या के समय स्त्री का सहवास न करें ।

👉 संध्याकाल अथवा प्रदोषकाल (सूर्यास्त का समय) में भोजन से शरीर में व्याधियाँ उत्पन्न होता है ।

👉 श्मशान आदि खराब स्थानों में घूमने से भय उत्पन्न होता है ।

👉 दिन में एवं संध्या के समय शयन आयु को क्षीण करता है ।

👉 पठन- पाठन करने से वैदिक ज्ञान और आयु का नाश होता है ।


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पंडित अक्षय जमदग्नि

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